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मजहब के नाम पर 1947 में भारत का बंटवारा हो चुका है लेकिन अब हिन्दू समाज किसी भी हालात देश में ऐसा कोई भी काम नहीं होने देगा जिससे देश की एकता, अखंडता खतरे में आये. जो गलत्ती हमने १९४७ में की वो गलती अब नहीं दोहराएंगे तथा जो भी देश को तोड़ने का प्रयास करने की सोचेगा भी, उसे कुचल दिया जायेगा. हिंदुस्तान में संवैधानिक व्यवस्था होते हुए भी शरिया अदालतें लागू करना हिंदुस्तान को इस्लामिक राष्ट्र बनाने की साजिश है जिसे बिलकुल नहीं होने दिया जा सकता. अगर मुस्लिम समाज शरिया दलित लागू करेगा तो हम भी "भगवा अदालत" लागू करेंगे जहाँ श्रीमद्भगवद गीता के अनुसार न्याय मिलेगा. ये घोषणा अखिल भारतीय हिन्दू शक्ति दल ने की.

आपको बता दें कि अखिल भारतीय हिन्दू शक्ति दल के राष्टीय अध्यक्ष संजय अग्रवाल शुक्रवार को मुज़फ्फरनगर पहुंचे. इस दाैरान मीडिया से बातचीत करते हुए उन्होंने मुस्लिम समुदाय द्वारा शरीयत अदालतों के बनाये जाने की माँग का जमकर विरोध किया. उन्होंने कहा कि शरीयत अदालतों का हिन्दू शक्ति दल विरोध करता है. मुस्लिम समाज को हम चेतावनी देते हैं कि भारत एक देश एक संविधान के तहत चलने वाला देश है इसलिए मुस्लिम समाज शरीयत अदालतों को लागू करने की जिद ना करे. अगर मुस्लिम समाज ने शरीयत कानून के लिए कदम बढ़ाया या मांग की तो हिन्दू शक्ति दल पूरे भारत के अंदर भगवा अदालतों की मांग करने के लिए सरकार पर दबाव बनायेगा.

हिन्दू शक्ति दल के राष्ट्रीय अध्यक्ष ने कहा कि वह मुस्लिम समाज से निवेदन कर रहे हैं लेकिन साथ ही चेतावनी भी दे रहे हैं कि वह हमें आक्रोशित करने का प्रयास न करे. शरिया अदालतों के बहाने गजवा ऐ हिन्द का उनका जो सपना उसे भूल जाएँ अन्यथा अगर हिन्दू समाज अपनी सी पर आया तो उचित न होगा. संजय अग्रवाल ने कहा कि भगवा अदालतों में जो भी फैसले या निर्णय लिए जायेंगे वो श्रीमद्भगवद्गीता के तहत ही लिए जायेंगे. इसमें किसी को भी निजी कानून चलाने का कार्य नहीं करना चाहये. इस बाबत उन्होंने अपना एक घोषणा पात्र भी दिखाया जिसमें में एक व्यक्ति, एक संविधान, एक नीति लिखी गयी है.

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