चाय पकोड़ा बेचने वाले लोग भिखारी होते हैं - कांग्रेसी, राहुल गांधी की सरकार आते हीसबको डीएम बना देंगे

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चाय पकोड़ा बेचने वाले लोग भिखारी होते हैं - कांग्रेसी, राहुल गांधी की सरकार आते ही सबको डीएम बना देंगे

विपक्ष ने देश की राजनीति का किस प्रकार कचरा करके रखा है वो किसी से छुपा नहीं है, जिस नीचता के साथ विपक्षी आज विरोध कर रहे हैं उसे देख कर यही लगता है की सच में देश बदल गया है, सरकार बनने के बाद राजनीति का स्तर क्या होगा यह हमेशा विपक्ष ही तय करता है, लेकिन जिस प्रकार से प्रधानमंत्री के उस बयान का गलत अर्थ निकालकर कांग्रेसी आज देश में पकौड़ा पॉलिटिक्स कर रहे हैं, उससे देश की राजनीति का स्तर साफ पता चलता है,

पिछले कुछ दिनों से कांग्रेस कह रही थी की सेना में लोग मजबूरी में भर्ती होते हैं, मजबूरी में लोग सब्जी बेचते हैं, मजबूरी में लोग चाय पकौड़ा बेचते हैं, मजबूरी में लोग कूड़ा उठाते हैं, कांग्रेसी सिर्फ लोगों का मनोबल गिरना चाहते हैं और कुछ नहीं, पहले सेना को मनोबल गिरा रहे थे, आज छोटे और माध्यम वर्गीय लोगों की तुलना भिखारियों से करके उनका मनोबल गिरा रहे हैं। लेकिन इनके कहने के अनुसार चलें तो क्या राहुल गांधी की सरकार आने पर सभी को डीएम बना देंगे या सभी को सरकारी नौकरी देके लाखों रुपये तनख्वाह देंगे।

जिन लोगों को लगता है की चाय पकौड़ा बेचना शर्म की बात है उनको आज मैं एक घटना बताता हूँ, मैं जिस आफिस में काम करता हूँ उसके नीचे लोग ठेले पर चाय, पकौड़ा, पूड़ी सब्जी, और पराठे की दुकान लगाते हैं, मेरी तनख्वाह महीने की 12000 रुपये हैं यानि की एक दिन के 400 रुपये , मेरे ऑफिस में करीब करीब 3000 लोग काम करते हैं और ऐसे ही 6 ऑफिस हैं आस पास और सभी आज की तारीख में ठेले पर ही चाय समोसा पानीपूरी सिगरेट वगैरह खाते पीते हैं और मेरा ठेले पर चाय पीने और खाने का औसत खर्चा 20 रुपये प्रति दिन है, तो अब आप सोच सकते हैं 3000*6=18000 लोग और 18000 लोगों का प्रतिदिन खर्चा 18000*20=360000 रुपये।

एक दिन का मैं एवरेज 3.5 लाख रख लेता हूँ, हमारे ऑफिस के बाहर ठेला लगाने वाले  मुश्किल से 60 से 70 लोग होंगे। अब उनका लगभग 5000 रुपये प्रतिदिन का बन जाता है, अब अगर मैं 2500 रुपये उनकी लागत जोड़ लूँ तो प्रतिदिन 2500 रुपये एक ठेले वाले के  बच जाते हैं , एक ठेले पर 4 से 5 लोग काम करते हैं और बराबर हिस्सा बांटने पर 500 रुपये प्रति व्यक्ति खाने पीने के बाद भी बच जाता है, अब आप सोच सकते हैं की कांग्रेस जनता को बेवकूफ बना रही है की ठेले और पकौड़े वाले ,

हाँ मैं मानता हूँ की सरकारी नौकरी अगर किसी को मिल जाये तो कोई ठेला लगाना नहीं पसंद करेगा, लेकिन हमे खुद सोचना पड़ेगा की देश में जितनी जनता है उतनी सरकारी नौकरियाँ तो नहीं बन सकती हैं न , तो जो व्यक्ति जिस भी काम को करके ईमानदारी से अपना और अपने परिवार का पेट भर रहा है उसके आत्मसम्मान को ठेस न पन्हुचाएँ, जय हिन्द जय भारत

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