अफजल, याक़ूब के लिए लड़ना मानवाधिकार है, और शम्भूनाथ के लिए न्याय मांगना सांप्रदायिकता हो गया

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अफजल, याक़ूब के लिए लड़ना मानवाधिकार है, और शम्भूनाथ के लिए न्याय मांगना सांप्रदायिकता हो गया

संसद पर हमले का मुख्य आरोपी अफजल गुरु था उसे देश की सबसे बड़ी अदालत ने फांसी की सजा सुनाई थी और फिर भी ये दोगले उसकी फांसी रुकाने के लिए प्रदर्शन कर रहे थे ये उनका मानवाधिकार था, लेकिन आज सेल्फ डिफेंस में किए गए अपराध के आरोपी शम्भूनाथ के लिए न्याय मांगना इन्हे सांप्रदायिक लगने लगा है, क्या मानवाधिकार सिर्फ विशेष जाति और धर्म के लोगों के लिए बने हैं, क्या मानवाधिकार में कोई ऐसा नियम या कानून है जो हिन्दुवों को मानव समझने से रोकता है। या कोई ऐसा शक्स उस स्थान पर बैठा है जंहा से वो इन हिन्दुवों के मानवाधिकारों का हनन करता है

मीडिया बताती है की सत्ता में बैठे लोग लव जिहाद और गौ हत्या के नाम पर अपनी सियासत का खेल खेल रहे हैं उन्हे दिखाई नहीं देता है या वो देखना नहीं चाहते आप भी देखिये इस मुजफ्फर नगर की घटना को ये घटना राजसमंद में हुई घटना के बाद घटित हुई है

मुजफ्फरनगर लव जिहाद रेप मर्डर जान से मारना

क्या इसके बाद भी आप कहेंगे की लव जिहाद जैसी कोई चीज नहीं होती, अगर आपका जवाब हाँ है तो आप भी उन पत्रकारों की तरह अंधे हो चुके हैं, आपको कुछ करने की जरूरत नहीं है लेकिन मैं इसके लिए लड़ूँगा मैं ई लव जिहादियों की पोल ऐसे ही खोलता रहूँगा अगर आप भी हमारी इस लड़ाई में शामिल होते हैं तो इसे शेयर कर दीजिये ताकि आपके इस कदम से कुछ हिन्दू लड़कियों को ये पता चल सके की when love is blind then end of the life

 

1 comment:

  1. […] को उसी की भाषा में समझाया था यानि की लव जिहाद करने वाले उस बांगाली मुल्ले को मौत के […]

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