हिन्दू मुस्लिम भाई-भाई कहने वालों के मुंह पर शायद इससे जोरदार तमाचा फिर कभी न पड़े

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हिन्दू मुस्लिम भाई-भाई कहने वालों के मुंह पर शायद इससे जोरदार तमाचा फिर कभी न पड़े

बात है हाल ही में हुये उप के पार्षद चुनावों की जिसमे से अधिकतर सीटें तो बीजेपी ने ही जीती हैं लेकिन 2 सीटों पर बसपा से दो मुस्लिम प्रत्याशी भी जीत गए । और जब उन्हे शपथ दिलाई गयी तो उन्होने हिन्दी में शपथ लेने से इंकार कर दिया और उर्दू में शपथ ली हद तो तब हो गयी जब उन्हे वंदे मातरम कहने से भी इंकार कर दिया। मतलब उनके लिए लोकतन्त्र देश समाज कुछ नहीं है उन्हे सिर्फ अपने मजहब से मतलब है उनके लिए देश और कानून मजहब के बाद आता है। ऐसा लग रहा था की ये मुसलिमजादा भारत में नहीं पाकिस्तान में शपथ ले रहा है। और जिस प्रकार से शपथग्रहन में हिन्दी भाषा और वंदे मातरम की धज्जियां उद्दाई हैं इन मुल्ले पार्षदों ने उससे ये भी साफ होता है की इन्हे क्या चाहिए।

इनकी पार्टी की मुखिया मायावती ने भी अभी तक इस विषय को लेकर कोई भी माफी नहीं मांगी । उसके बाद जब ये दोगले हिन्दू आतंकवाद की बाद करते हैं तुष्टीकरण की बात करते हैं तब हर एक हिन्दू का खून खौल जाता है जब बात करते हैं। शायद अब मायावती की आँखें बंद हो गयी है जब उनकी पार्टी के मुस्लिम नेता जातिवाद की राजनीति कर रहे हैं । लेकिन तब तो गला फाड़ फाड़ के चिल्ला रही थी की बीजेपी सांप्रदायिक पार्टी है बीजेपी जाति और धर्म की राजनीति करती है। अगर कोई भी नेता या एक नॉर्मल पर्सन हिन्दुत्व की बात करे राष्ट्र की बात करे भारत माता की जय बोले तो उसे बीजेपी या आरएसएस वाला समझा जाता है उसे सांप्रदायिक समझा जाता है। लेकिन एक बार उन हिन्दुवों और देशभक्तों को भी बधाई देना चाहता हूँ जिन्होने इन दो मुस्लिम पार्षदों को अपना वोट देकर अपने राष्ट्र का अपनी मातृभाषा हिन्दी का अपमान करवाया है

भारत माता की जय वंदे मातरम

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