शंभू ने हत्या नहीं वध किया है और वध दुष्टों का किया जाता है - कवि अमित शर्मा

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शंभू ने हत्या नहीं वध किया है और वध दुष्टों का किया जाता है - कवि अमित शर्मा

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पिछले कुछ दिनों से शम्भूनाथ के ऊपर मीडिया ने जो बवाल मचा रखा है उसको हत्यारा घोषित करने पर तुली हुई है। और जिस प्रकार से मुल्ले शम्भूनाथ को फांसी देने की मांग कर रहे हैं । ये सब देखते हुये किसी भी व्यक्ति का खून खौल सकता है अगर हम मुस्लिम समाज को छोड़ दें और अगर सिर्फ हिन्दू समाज की बात करें तो लगभग 30 प्रतिशत से ज्यादा सेक्युलर हिन्दू ही शंभू के विरोध में खड़े हैं जबकि मीडिया ने भी ये साफ कर दिया है की अगर शंभू नाथ उस जिहादी को नहीं मारता तो वो जिहादी शम्भूनाथ को उसके पूरे परिवार समेत मार देता ।

उस जिहादी और उसकी गैंग ने शम्भूनाथ को पहले से ही जान से मारने की धम्की दे डाली थी जब शंभू को कानून से भी कोई मदद और सुरक्षा नहीं मिली तब उसने सेल्फ डिफेंस में ये कदम उठाया । हाँ मैं मानता हूँ की शायद शंभू का तरीका गलत था लेकिन काम उसने सही किया है। आखिर कब तक हम ऐसे ही शांति की बात करते रहेंगे कब तक हम गांधी के सत्या और अहिंसा के मार्ग पर चलकर अपनी बहन बेटियों की इज्जत के साथ इन वहशी दरिंदे मुल्लों को खेलने देंगे ।

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कब तक उन 8-9 साल की दलित बच्चियों के बांग्लादेशी बलात्कारियों को यूंही माफ करते रहेंगे। जिन भेड़ियों ने उस 9 साल की बच्ची के तन को नोच नोच के खाया था । और आज शंभू की बहन के साथ ये घिनौना कृत्य किया कल किसी और के साथ करते परसों किसी और के साथ । बस अब बहुत हो गया बर्दाश्त की भी हद होती है । अब अगर अफजल और कसाब जैसे पैदा होंगे तो शंभू जैसे भी उन्हे जिंदा फूंकने के लिए तैयार रहेंगे ।

शहद और घी दोनों अमृत हैं लेकिन अगर साथ में मिला दो विष बन जाते हैं उसी प्रकार से सत्या और अहिंसा भी सनातन धर्म के अमृत समान गुण है लेकिन अगर दोनों को साथ में मिला दोगे तो विष हो जाएगा ये शरीर दूषित हो जाएगा ये मर्दों की टोली नामर्द बन जाएगी ये देश किसी कसाब का नहीं कलाम का देश है ये किसी गौरी गाजी या औरंगजेब का देश नहीं ये देश वीर शिवाजी राणा प्रताप जैसे शेरों का हैं इसलिए जो भी हिन्दू को मिटाने की सोचेगा वो खुद ही मिट जाएगा

जय माँ भवानी

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